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वारदात के समय आरोपी के नाबालिग होने का तर्क
कस्बा/अजमेर। नाबालिग से दुष्कर्म के प्रकरण में विशेष पोक्सो न्यायालय ने आरोपी के नाबालिग होने के तर्क को मानते हुए प्रकरण को किशोर न्याय बोर्ड को सौंपने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार, पीड़िता की ओर से मामला दर्ज कराया गया कि वह घर से फरार हो गई थी, जिसे किशनगढ़ रेलवे स्टेशन से दस्तयाब किया गया। उसने बताया कि अजमेर के रहने वाले एक युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी को बालिग बताते हुए पोक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि वारदात के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष 6 माह थी। इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से जन्म प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज पेश कर नाबालिग होने का दावा किया गया।
इस आधार पर आरोपी को किशोर मानते हुए प्रकरण की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में किए जाने की मांग की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी की उम्र निर्धारण के लिए दस्तावेजों की जांच की। इसमें पाया गया कि आरोपी का जन्म 13 दिसंबर 2003 को हुआ और घटना 13 सितंबर 2021 की है। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग मानते हुए प्रकरण को किशोर न्याय बोर्ड को सौंपने के आदेश दिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी की उम्र संबंधी दस्तावेज वास्तविक प्रतीत होते हैं, इसलिए यह मामला किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत आएगा।