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अजमेर | भ्रामक जानकारी देकर मकान बेचकर 15 लाख रुपए लेने के बाद मकान की रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर करने के मामले में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने सिविल लाइन थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या तीन के लिंक मजिस्ट्रेट प्रीतम सिंह ने परिवादी रैंबुल रोड निवासी पल्लव शर्मा की शिकायत पर आरोपी आनंदी देवी, शशि गौतम, राजश्री, उमा शर्मा और
संतोष शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी के मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में परिवादी पल्लव शर्मा ने वकील गगन वर्मा के जरिए परिवाद पेश किया था। इसमें बताया गया था कि उसने दो मंजिला मकान आनंदी देवी, शशि गौतम से खरीदा था। इसके एवज में उसने 15 लाख रुपए के दो चैक दिए थे। आनंदी देवी ने उसे एक शपथ पत्र इस आशय का दिया कि उक्त संपत्ति के दस्तावेज गुम हो गए हैं। तलाश की जा
रही
है, मिलने पर यह मूल
दस्तावेज उसे सौंप दिया
जाएगा। परिवादी पल्लव ने बताया कि
5 सितंबर को उसे कोर्ट
से नोटिस मिला, जिसमें बताया गया कि आनंदी
देवी ने अपने अन्य
परिजनों के साथ मिलकर
सिविल न्यायालय में बेची गई
संपत्ति को लेकर वाद
दायर किया है। जबकि
उसे मकान बेचने के
दौरान आनंदी देवी ने बताया
था उसका एकल स्वामित्व
है इस मामले में
कोर्ट के आव मुकदमा
दर्ज कर जांच करेगी।
कोर्ट ने दिए जुर्माना और क्षतिपूर्ति के भी आदेश
अजमेर। न्यायालय विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण क्रम-2) श्रीमती दिव्या कुमार अग्रवाल ने चैक bounce के प्रकरण में दो आरोपियों को 2-2 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन अधिकारी एडीपीपी सुमन पहाड़िया ने बताया कि परिवादी रवीन्द्र सिंह निवासी खाचरियावास ने परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उसने 47 लाख 50 हजार की राशि आरोपी को उधार दी। इसके बदले में उसे चैक दिया गया। वह बैंक में पेश करने पर dishonor हो गया।
कोर्ट ने आरोपीगण को दोषी मानते हुए 2-2 साल की सजा व क्षतिपूर्ति के रूप में राशि लौटाने का आदेश दिया।
अधिक न्यायिक हिरासत बनी आधार
कस्बा/अजमेर। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों की ओर से स्वत: संज्ञान लेते हुए संदेशा भेजने के महिला की मौत के मामले में गिरफ्तार आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है।
मामले में पीड़िता ने आरोपी अर्जुन चौधरी निवासी देवली को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने मौत से पहले वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। इसमें उसने आरोपी अर्जुन चौधरी से प्रताड़ित होकर आत्महत्या करने की बात कही थी। वह 21 मार्च को अजमेर जिले के सरवाड़ थाना क्षेत्र के खाखवड़ी गांव के रास्ते के खेत में पहुंची। उसी जगह के पास उसका शव मिला। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
इस दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले में कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी। सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट निखिल गोयल व एडवोकेट राजीव कुमार ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पिछले कई माह से जेल में बंद है। जबकि जांच पूरी हो चुकी है। कोर्ट में चार्जशीट पेश हो चुकी है। ऐसे में आरोपी को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। मामले की अगली सुनवाई में वक्त लगेगा। आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए।
वकीलों के तर्कों से सहमत होते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।
वारदात के समय आरोपी के नाबालिग होने का तर्क
कस्बा/अजमेर। नाबालिग से दुष्कर्म के प्रकरण में विशेष पोक्सो न्यायालय ने आरोपी के नाबालिग होने के तर्क को मानते हुए प्रकरण को किशोर न्याय बोर्ड को सौंपने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार, पीड़िता की ओर से मामला दर्ज कराया गया कि वह घर से फरार हो गई थी, जिसे किशनगढ़ रेलवे स्टेशन से दस्तयाब किया गया। उसने बताया कि अजमेर के रहने वाले एक युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी को बालिग बताते हुए पोक्सो एक्ट के तहत आरोप लगाए गए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि वारदात के समय आरोपी की उम्र 17 वर्ष 6 माह थी। इस दौरान बचाव पक्ष की ओर से जन्म प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज पेश कर नाबालिग होने का दावा किया गया।
इस आधार पर आरोपी को किशोर मानते हुए प्रकरण की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में किए जाने की मांग की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी की उम्र निर्धारण के लिए दस्तावेजों की जांच की। इसमें पाया गया कि आरोपी का जन्म 13 दिसंबर 2003 को हुआ और घटना 13 सितंबर 2021 की है। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग मानते हुए प्रकरण को किशोर न्याय बोर्ड को सौंपने के आदेश दिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी की उम्र संबंधी दस्तावेज वास्तविक प्रतीत होते हैं, इसलिए यह मामला किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत आएगा।
मुशमी | विशेष न्यायाधीश (महिला अत्याचार निवारण न्यायालय) अजमेर के न्यायाधीश राजेश मीणा ने जानलेवा हमला करने के आरोपी शिवराज गुर्जर को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। आरोपी की ओर से पैरवी डॉ. गगन वर्मा व प्रकाश रावत ने की। परिवादी कालू गुर्जर ने किशनगढ़गंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि आरोपी शिवराज ने उसके पुत्र अर्जुन गुर्जर के साथ मारपीट कर पेट पर पत्थर मार गंभीर घायल कर दिया। आरोपी के वकीलों के तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
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